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॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥
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॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
धन-समृद्धि

वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

"दारिद्र्य नाशिनी, धन-धान्य एवं अष्टलक्ष्मी सिद्धि प्रदायक शुक्रवार व्रत"

🕒 पठन समय: 10 मिनट📅 शुभ दिन: शुक्रवार (न्यूनतम 11 या 21 शुक्रवार का संकल्प)🕉️ आराध्य: माता महालक्ष्मी (अष्टलक्ष्मी स्वरूप)
कथा का महात्म्य एवं सार:वैभव लक्ष्मी का व्रत स्त्री अथवा पुरुष कोई भी श्रद्धापूर्वक कर सकता है। यह व्रत घर में खोई हुई सुख-समृद्धि और धन वैभव को पुनः लौटाने के लिए अत्यंत चमत्कारी माना गया है।

सम्पूर्ण कथा के अध्याय (Chapters):

1शीला का सदाचार और पति का कुमार्ग

एक नगर में शीला नाम की एक धर्मपरायण स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। उसका पति पहले बहुत अच्छा था, परंतु बुरी संगति में पड़कर जुआ, मदिरा और अनैतिक कार्यों में अपना सारा धन गंवा बैठा। घर में अन्न का दाना तक नहीं बचा।

2वृद्धा रूप में माँ लक्ष्मी का पदार्पण

एक शुक्रवार की दोपहर एक वृद्ध माता शीला के द्वार पर आईं। शीला ने सत्कार किया। वृद्धा ने उसे माता वैभव लक्ष्मी के व्रत की गुप्त विधि बताई। शीला ने पूर्ण निष्ठा से श्रीयंत्र और सोने/चांदी के सिक्के के सम्मुख शुक्रवार को खीर का भोग लगाकर व्रत किया।

3पति का पश्चाताप और वैभव की पुनः प्राप्ति

व्रत के प्रभाव से शीला के पति की बुद्धि शुद्ध हो गई। उसने समस्त व्यसनों का त्याग कर पुनः व्यापार प्रारंभ किया और कुछ ही महीनों में उनका घर धन-धान्य और वैभव से परिपूर्ण हो गया।

🧺 आवश्यक पूजन सामग्री:

  • ✓श्रीयंत्र या लक्ष्मी जी की छवि
  • ✓सोने या चांदी का सिक्का (या तांबे का सिक्का)
  • ✓चावल की खीर
  • ✓लाल पुष्प
  • ✓लाल वस्त्र

🪔 उद्यापन एवं व्रत नियम:

सायंकाल पाटा बिछाकर लाल वस्त्र पर चावल की ढेरी बनाएं, उस पर जल से भरा तांबे का लोटा और सिक्के की पूजा करें। माता को खीर का भोग लगाएं और कम से कम 7 स्त्रियों को वैभव लक्ष्मी पुस्तक भेंट करें।

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