"महाशिवरात्रि, प्रदोष एवं सोमवार शिव व्रत की प्रामाणिक कथा व अभिषेक विधि"
🕒 पठन समय: 12 मिनट📅 शुभ दिन: फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी-चतुर्दशी, प्रत्येक सोमवार एवं प्रदोष🕉️ आराध्य: महाकाल भगवान भोलेनाथ
कथा का महात्म्य एवं सार:महाशिवरात्रि वह परम पावन रात्रि है जब भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे और माता पार्वती संग उनका पावन विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन अनजाने में भी की गई शिव पूजा मोक्षदायिनी सिद्ध होती है।
सम्पूर्ण कथा के अध्याय (Chapters):
1व्याध लुब्धक और बेलपत्र के वृक्ष का प्रसंग
चित्रभानु नामक एक शिकारी शिकार की खोज में वन में भटकता रहा। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह एक जलाशय के किनारे बेल के वृक्ष पर चढ़ गया। वृक्ष के नीचे एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित था, जिससे वह अनभिज्ञ था। शिकार की प्रतीक्षा में वह अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा, जो सीधे शिवलिंग पर गिरते गए।
2मृग परिवार का सत्यवादी वचन और हृदय परिवर्तन
रात्रि के चारों प्रहरों में एक-एक करके हिरणी और हिरण आए। जब शिकारी ने बाण चढ़ाया, तो प्रत्येक मृग ने अपने बच्चों से मिलकर वापस आने का वचन दिया। शिकारी ने दया कर उन्हें जाने दिया। चारों प्रहर शिकारी के आंसुओं और बेलपत्रों से शिवलिंग का स्वतः अभिषेक होता रहा।
3भगवान शंकर का साक्षात दर्शन और मोक्ष
प्रातःकाल जब पूरा मृग परिवार अपने वचनानुसार शिकारी के सामने उपस्थित हुआ, तो शिकारी का कठोर हृदय पश्चाताप और करुणा से पिघल गया। उसने अपने अस्त्र फेंक दिए। तत्काल भगवान आशुतोष प्रकट हुए और शिकारी को शिवलोक में स्थान प्रदान किया।
🧺 आवश्यक पूजन सामग्री:
✓बेलपत्र
✓धतूरा
✓भांग
✓पंचामृत
✓इत्र
✓भस्म
✓रुद्राक्ष माला
🪔 उद्यापन एवं व्रत नियम:
महाशिवरात्रि के दिन चारों प्रहर (संध्या, मध्यरात्रि, तृतीय पहर और भोर) में शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद व गंगाजल से रुद्राभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करें।