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॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥
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॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
आरती संग्रह • Aarti Sangrahशुक्रवार, मंगलवार एवं नवरात्रि

माँ दुर्गा / अम्बे जी की आरती

"जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥"

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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुःखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरुँ।

बाजत ताल मृदङ्गा, अरु बाजत डमरु॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पति कर्ता॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥ ॐ जय अम्बे गौरी...॥

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