आरती संग्रह • Aarti Sangrahपूर्णिमा एवं गुरुवार
भगवान श्री सत्यनारायण जी की आरती
"जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥"
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जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे।
नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरश दियो।
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
दुर्बल भील कठौती, काष्ठ धारि आयो।
कथा श्रवण कर उसने, परम धाम पायो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
साधु बनिक विस्मय कर, सन्तति सुख पायो।
सत्यनारायण कृपा से, सब संताप नशायो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
भाव-भक्ति से जो जन, आरति नित गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
